पतंग उडाने के नुक़सानात
आजका सवाल नम्बर २३१३
इस्लामी शरीयत में पतंग उडाना ना जाईज क्यूं है ?
जवाब
حامدا و مصلیا و مسلما
पतंग उडाने के बहुत ही ज्यादा दुनियवी और उखरवी नुकसानात है जिसकी वजह से उसका उडाना नाजाईज है.
पतंग उडाने के नुकसानात नीचे के मुताबिक है.
1. फूज़ुलखर्ची माल व सलाहियत का बर्बाद करना
2. पतंग की तरफ नज़र होनेकी वजहसे नीचे गीर कर मर जाने या ज़ख्मी होने का खतरा.
3 रास्तेसे गुजरनेवाले कितने ही बेकसूर इन्सान के गले कटनेकी वजह से मारे गए या सख्त ज़ख्मी हुए.
4. ज़ख्मी होने वाले मज़लुमो की बददुआ लगना या मरनेवाले की बेवा और यतीमोकी बददुआ और हाय लगना..
5. कितने ही मासूम परीन्दो (पक्षी) इस की दोरी से कट कर मर जाते है या ज़ख्मी होते है।
6 पतंग अकसर टेरस ओर छत पर चढ़ कर उड़ाई जाती है जिस की वजह से आस पास के धरोंकी बेपर्दगी और बदनिगाही होती हैं.
7. शरीफ बा परदा औरतों को कपडे सुखाने में और खिड़की दरवाजे बंद रखने में तकलीफ होती है.
8. रोड पर पतंग लुटनेवाले की एक्सीडेंट दुर्घटना हो जाती है.
9. गाडी चलाने वाले भी बाज़ मरतबा इनकी वजह से गाड़ी के साथ गीरकर ज़ख्मी होते है या उनकी गाडी का नुकसान होता है .
10.गाडी चलाने वाले के दरमियांन अचानक दोरी आने के हर वक्त डरकी वजह और इन पतंग लूटनेवालोकी वजहसे गाडी चलानेमैं तकलीफ होती हैं.
11 मस्जिद की जमात बल्कि खुदकी नमाज से गाफिल हो जाता है.
12. पुरा दिन पतंग उडाने में गुजरनेकी वजह से बडों की दूकान ओर नौकरी का हरज और बच्चों के मदरसाकी स्कूल की पढाई का नुकसान.
13.हर एक की नियत दूसरे का पतंग काटने की होने की वजह से नुकसान पहुंचाने का गुनाह..
14.जिसका पतंग कट गया उसके दिल में अदावत और की़ना, और उसका पतंग काटकर बदला लेने के जज़्बात का पैदा हो जाना.
15. शोरगुल, सीटीयां,ओर डीजे की वजह से, आराम करनेवाले बीमार, बुढे, और के़लुल्लाह करनेवाले नेक बन्दोंकी नींद में खलेल पहोंचाना.
16. म्युजीक ओर गाना सुनने ओर सुनना न चाहनेवालों को सूनानेका गुनाह होगा.
17. नमाज के वक्त भी जोर से डीजे बजानेकी वजहसे इमाम की कीऱात ओर मुसललीओं की नमाज़ में खलेल पड़ना
18.कई दिन तक घुप में पतंग उडाने की वजहसे जिस्मानी रंग ओर आंखो की रौशनी पर असर पडना.
19. गैरो की मुशाहबत कॉपी होने की वजहसे क़यामत में उनके साथ हश्र होना, उन्हीं में शुमार होना.
20. पतंग लुटने के गुनाह.
21. उसकी दोरी तोड कर चुराने के गुनाह।
22. ऐसा फुजूल काम जिस में दुनिया व आखिरत का कोई नफा नही,कीमती वक़्त जाया करना.
23. गैरों के इस त्योहार को अच्छा समज ने और इन गुनाहों पर खुश होनेकी वजह से इमान के बर्बाद ओर काफिर हो जानेका खतरा.
24. मौत क़ा कोई वक्त तय नहीं गैरों का त्यौहार और इन तमाम गुनाहों को करते करते अचानक मौत आ गइ तो खातमा बुरा हो जाना, वगैरह बहुत सारे नुकसान है
*लिहाज़ा इस मेसेजको खूब फौरवर्ड करें, अपने घर वालों को सुनायें. और पतंग की लानत से खुद बचे और अपने बच्चोंको खास बचाये, बचपन ही से इसकी नफरत डाले.*
و الله اعلم بالصواب
*इस्लामी तारीख़*
२६ रबीउल आखर १४४२ हिजरी
मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.
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Saturday, December 12, 2020
𝐈𝐬𝐥𝐚𝐦𝐢𝐜 𝐌𝐬𝐠 𝐎𝐟𝐟𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥's Post
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